देवहूति पूछें कपिल जी से कि प्रकृति, पुरुष और महतत्व आदि का ! देवहूति पूछें कपिल जी से कि प्रकृति, पुरुष और महतत्व आदि का !
माया मोह से पीछा छूटे और भक्ति और ज्ञान मिल जाये! माया मोह से पीछा छूटे और भक्ति और ज्ञान मिल जाये!
जगत जननी बना के जो पूजते हो मुझे, क्यूं दुत्कारी जाती हूं हर जगह .. जगत जननी बना के जो पूजते हो मुझे, क्यूं दुत्कारी जाती हूं हर जगह ..
कहीं नदिया है कहीं घाटियाँ कहीं फूलों की बगिया है कहीं रेत कहीं झरने है कहीं नदिया है कहीं घाटियाँ कहीं फूलों की बगिया है कहीं रेत कहीं झरने है
तू वरदायनी, सुख दायिनी जगदंबे माँ करो कृपा और विनती सुनो माँ ••• तू वरदायनी, सुख दायिनी जगदंबे माँ करो कृपा और विनती सुनो माँ •••
तू बाबा मशान में रंग जमाती मैं गुरुद्वारे में लंगर खाता। तू बाबा मशान में रंग जमाती मैं गुरुद्वारे में लंगर खाता।